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संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 के अंतर्गत पट्टे से संबंधित क्या प्रावधान हैं? (What are the provisions related to a lease under the Transfer of Property Act, 1882?)
पट्टा संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 105-117 के अंतर्गत परिभाषित है। यह भूमि या संपत्ति के उपयोग का अधिकार एक निश्चित अवधि और प्रतिफल के अधीन देता है। इसमें पक्षकार, अवधि, विषय वस्तु, और अधिकारों व दायित्वों का निर्धारण किया गया है।
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अचल संपत्ति का बंधक क्या है? (What is the Mortgage of Immovable Property?)
बंधक एक कानूनी व्यवस्था है, जिसमें उधारकर्ता अपनी स्थावर संपत्ति को ऋण के बदले सुरक्षा के रूप में देता है। संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 के तहत बंधक के विभिन्न प्रकार और अधिकार निर्धारित हैं, जैसे सादा बंधक, सशर्त विक्रय, और मोचन अधिकार।
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संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के तहत अजन्मे व्यक्ति के लाभ के लिए हस्तांतरण कैसे किया जाता है?
संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 13 के तहत अजन्मे व्यक्ति के लाभ के लिए संपत्ति का हस्तांतरण किया जा सकता है। इसमें पहले एक जीवित व्यक्ति के पक्ष में जीवनहित का सृजन और अजन्मे व्यक्ति को संपत्ति में पूर्ण हित का प्रावधान होता है।
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क्या संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के अंतर्गत भागिक पालन का सिद्धांत (Doctrine of Part Performance) लागू होता है?
भागिक पालन का सिद्धांत भारतीय संपत्ति अधिनियम, 1882 के तहत कार्य करता है। यह सिद्धांत तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति संपत्ति के स्थानांतरण के लिए कार्य करता है, भले ही अनुबंध लिखित न हो, और उसे न्यायालय में मान्यता मिल सकती है।
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लिस पेंडेंस का सिद्धांत क्या है? (What is the Principle of Lis Pendens?)
स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम, 1882 की धारा 52 के तहत लिस पेंडेंस का सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि लंबित न्यायिक विवाद में शामिल किसी संपत्ति का हस्तांतरण न हो, जिससे न्यायिक परिणामों की सुरक्षा हो और तीसरे पक्ष के अधिकारों का हस्तक्षेप न हो।
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संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 41 प्रत्यक्ष हस्तांतरण को किस प्रकार प्रभावित करती है?
संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 41 प्रत्यक्ष स्वामी के सिद्धांत को स्थापित करती है। यह निर्दोष खरीदारों को सुरक्षा प्रदान करती है, बशर्ते उन्होंने उचित सावधानी बरती हो और हस्तांतरण सप्रतिफल हो। इससे संपत्ति लेन-देन में स्थिरता आती है।
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क्या संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के अंतर्गत कपटपूर्ण अंतरण (Fraudulent Transfer) को मान्यता दी जाती है?
संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 53 के तहत यदि हस्तांतरण लेनदारों को धोखा देने या उनके दावे विफल करने के उद्देश्य से किया गया हो, तो यह शून्यकरणीय होगा। सद्भावनापूर्वक और प्रतिफल के लिए किए गए हस्तांतरण इस नियम से अपवाद हैं।
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संपत्ति कानून में सशर्त हस्तांतरण क्या है?
संपत्ति कानून में सशर्त हस्तांतरण का तात्पर्य ऐसे लेनदेन से है, जो किसी शर्त की पूर्ति पर निर्भर करते हैं। शर्तें वैध, कानूनी, नैतिक और संभव होनी चाहिए। यह अवधारणा संपत्ति लेनदेन को विशिष्ट आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार ढालने में सहायक है।
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संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के तहत क्या अजन्मे व्यक्ति के लाभ के लिए हस्तांतरण संभव है?
संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 13 अजन्मे व्यक्ति के लाभ के लिए संपत्ति हस्तांतरण की अनुमति देती है। इसके तहत, संपत्ति में पूर्विक जीवन हित सृजित होना चाहिए, और अजन्मे व्यक्ति को पूर्ण हित केवल उसके जन्म के बाद ही प्राप्त होता है।
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चल एवं अचल संपत्ति का अर्थ एवं परिभाषा क्या है?
चल संपत्ति वह होती है जिसे स्थानांतरित किया जा सकता है, जैसे वाहन, मशीनरी आदि, जबकि अचल संपत्ति स्थायी होती है और स्थानांतरित नहीं की जा सकती, जैसे भूमि, भवन। संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 इन संपत्तियों के अधिकार और लेनदेन को नियंत्रित करता है।
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हस्तांतरणीय और गैर-हस्तांतरणीय संपत्ति क्या होती है?
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भारत में संपत्ति के हस्तांतरण को नियंत्रित करता है। यह हस्तांतरणीय और गैर-हस्तांतरणीय संपत्ति को परिभाषित करता है और वैध हस्तांतरण के लिए सहमति, कानूनी क्षमता, और संपत्ति की पहचान जैसी शर्तों को निर्धारित करता है।
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संपत्ति हस्तांतरण की अवधारणा क्या है?
संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 संपत्ति के अंतरण की प्रक्रिया, नियम, और पक्षकारों के अधिकार-कर्तव्यों को स्पष्ट करता है। यह स्थावर व जंगम संपत्तियों के अंतरण को विनियमित कर पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। संशोधन से अद्यतन बना रहता है।
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What is Malicious Prosecution under the Law of Tort?
Malicious prosecution under tort law involves initiating legal proceedings with malice and without probable cause. Key elements include lack of reasonable cause, malice, favorable termination for the plaintiff, and resulting damages, ensuring protection from legal abuse.
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glossary

Legal Maxim: Novus Actus Interveniens

Novus Actus Interveniens is a legal doctrine that breaks the chain of causation, relieving a defendant of liability when an unforeseeable, independent act intervenes between their action and the resulting harm.

Akash Srivastava· ·6 min read
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Independent and Joint Tortfeasors
In tort law, joint tortfeasors are individuals who collectively cause harm, sharing full liability, while independent tortfeasors act separately, each bearing responsibility only for their actions. Indian courts, lacking specific statutory guidance, rely on common law to distinguish between them. Jo
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General Defences under Tort
General defences in tort law allow a defendant to avoid liability despite the occurrence of a tort, based on specific legal justifications. These defences, such as volenti non fit injuria (consent to risk), inevitable accident, and statutory authority, balance fairness by protecting individuals from
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Capacity to sue and Capacity to be sued in Torts
The concept of capacity to sue and be sued in tort law defines who can initiate or defend against a civil suit for wrongful acts. While generally all individuals possess this right, certain exceptions exist based on legal disabilities, such as minors, lunatics, foreign sovereigns, and corporations.
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